जयवीर गोदारा का संकल्प:
एक सशक्त मरु प्रदेश

मरु प्रदेश के समग्र विकास का असली ब्लूप्रिंट। हमारा दृढ़ विश्वास है कि प्रदेश जितना छोटा होगा, विकास उतनी ही तीव्र गति से होगा। मरु प्रदेश के निर्माण के बिना हमारा पूर्ण विकास संभव नहीं है।

किसान व ग्राम विकास

  • खेती को घाटे का नहीं, फायदे का सौदा बनाना।
  • किसानों को दूध का MSP ₹100 प्रति लीटर देना सुनिश्चित करना।
  • किसानों को सोलर पैनल लगाने पर 90% की सब्सिडी उपलब्ध करवाना।
  • हर पंचायत में एक विशेष 'कागजी अधिकारी' नियुक्त करना, जिसका काम ग्रामीणों के लोन, सब्सिडी, बीमा व जमीन के कागजात तैयार करवाकर उच्च अधिकारियों तक पहुंचाना होगा, ताकि गाँव वालों को दफ्तरों के धक्के न खाने पड़ें।

पर्यावरण व जल संरक्षण

  • मरुभूमि में पानी की भयंकर कमी को दूर करने के लिए विशेष जल प्रबंधन।
  • विलुप्त हो चुकी बरसाती नदियों को सजीव कर घग्घर नदी का पानी लूणकरणसर, सरदारशहर, डीडवाना, सुजानगढ़ तक लाना।
  • धोरों के बीच जहाँ भी सरकारी जमीन है, वहाँ डैम बनाकर जल संचय (Water Harvesting) करना।
  • हर पंचायत की सरकारी भूमि में एक तालाब बनाना, जिसके चारों तरफ वन क्षेत्र हो।
  • 1 बड़ा पेड़ काटने पर 3 नए पेड़ लगाना अनिवार्य होगा। मनरेगा के तहत पेड़ों की देखभाल तय की जाएगी।

शिक्षा में सुधार

  • शिक्षा के बढ़ते निजीकरण पर रोक और प्राइवेट स्कूलों की फीस पर सख्त कंट्रोल।
  • विद्यार्थियों के लिए B.A. तक की शिक्षा पूरी तरह मुफ्त करना।
  • शिक्षकों की जिम्मेदारी केवल बच्चों को पढ़ाने की होगी, और उनकी जवाबदेही 'रिजल्ट बेस' तय की जाएगी।
  • प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए कोचिंग की सरकारी व्यवस्था करना।

रोजगार व स्थानीय उद्योग

  • स्थानीय 'रॉ-मैटेरियल' से बनने वाले उद्योगों को मरु प्रदेश में लगाना।
  • जिस किसान या व्यक्ति की ज़मीन से मिनरल्स निकलेंगे, उसे आय का 5% हिस्सा अनिवार्य रूप से दिया जाएगा।
  • स्थानीय लोगों के लिए कौशल विकास और स्वरोजगार के अवसर बढ़ाना।

स्वास्थ्य सेवा

  • ग्रामीण क्षेत्रों की हर पंचायत में 10 से 15 बेड का अस्पताल सुनिश्चित करना।
  • सरकारी डॉक्टरों की प्राइवेट प्रैक्टिस पर पूर्ण पाबंदी लगाना।
  • प्राइवेट अस्पतालों में ओपीडी (OPD) से लेकर हर इलाज का रेट सरकार द्वारा तय होना।
  • नकली दवाइयां बेचने वालों पर देशद्रोह के समान मुकदमा दर्ज कर सख्त कार्रवाई करना।

महिला सशक्तिकरण

  • हर पंचायत में एक महिला अधिकारी की नियुक्ति करना, जो सीधे तौर पर महिलाओं की उत्पीड़न या रोज़गार संबंधी समस्या को उच्च अधिकारियों तक पहुँचाएगी।
  • महिलाओं को सुरक्षा, शिक्षा, और आर्थिक अवसरों के माध्यम से समाज में सशक्त स्थान दिलाना।